शहर के पार की घंटी
दो बच्चे जंगल में अलग रास्ते लेकर शहर के पार सुनाई देती रहस्यमय घंटी को खोजते हैं।
मुफ़्त पढ़ें · दस सचित्र पन्ने · खाते की ज़रूरत नहीं
बड़ों के लिए कहानी का नोट
Keeps poetic invisible bell and two paths; omits injuries, mockery and religious ceremony. The sound remains a fairy-tale mystery.
पन्ना 1

साँझ को जंगल से गहरी घंटी सुनाई देती। उसका मीनार नहीं मिलता था। लोग सड़क पर रुकते और छतों के ऊपर आती रहस्यमय आवाज़ सुनते।
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पन्ना 2

लोग जंगल किनारे गए, फिर चाय-मिठाई पर रुके। पास समझते थे, पर ध्यान से सुनते तो आवाज़ पेड़ों के और भीतर से आती लगती थी।
पन्ना 3

एक दोपहर बच्चों ने खोजने की सोची। काई वाले पत्थरों के पास चले। कुछ थककर लौटे और कुछ नाले के पास फूल चुनने रुक गए।
पन्ना 4

छोटे वनघर की छत पर घंटी थी। अधिकतर खुश हुए। राजकुमार ने फिर सुना। यह पतली टनटनाहट शहर की गहरी आवाज़ से अलग थी।
पन्ना 5

वह आगे गया और भूरे कोट वाला गाँव का लड़का मिला। घर का काम पूरा करके वह भी खुद अनोखी आवाज़ का पता लगाने आया था।
पन्ना 6

राजकुमार को बायाँ रास्ता सही लगा, लड़के को दायाँ। दोनों अलग चले और मिलने पर जो पाया हो, एक-दूसरे को बताने का वादा किया।
पन्ना 7

राजकुमार शांत झीलों से गुज़रा। लड़का जड़ों वाले छायादार रास्ते चला। अगला कदम चुनने से पहले दोनों बार-बार रुककर ध्यान से सुनते थे।
पन्ना 8

सूर्य डूबने पर राजकुमार चौड़े पथ से समुद्र ऊपर पहुँचा। लड़का दूसरी ओर से उसी ऊँचाई पर आया। देखकर दोनों खुशी से मिलने दौड़े।
पन्ना 9

सामने पानी, सुनहरे बादल और जंगल की शाम थी। घंटी जैसे सबमें गूँजती थी। धातु की घंटी नहीं मिली, पर दोनों उसकी धुन तक पहुँचे थे।
पन्ना 10

पहले तारे तक साथ रहे, फिर सुरक्षित रास्ते घर चले। अलग यात्राएँ एक ही आश्चर्य तक लाई थीं—जीती दुनिया जैसे ध्यान से सुने जाने का इंतज़ार करती थी।
About this Neutoons edition
Original bilingual retelling, based on the cited old collection; shortened and softened for family reading.
Source tradition: Danish literary fairy tale. Based on “The Bell” in Andersen's Fairy Tales. Explore the source.
Neutoons English and Hindi text. AI-generated illustrations. This edition has still illustrations. The ten-page edition has no audio narration.



