दोबारा पूछने वाली बकरी
सावधान बकरी लुभावना निमंत्रण परखकर सुरक्षित रहती है।
मुफ़्त पढ़ें · दस सचित्र पन्ने · खाते की ज़रूरत नहीं
बड़ों के लिए कहानी का नोट
Read together and discuss the characters’ choices. This adaptation softens threatening moments and does not reproduce the source illustrations.
पन्ना 1

समझदार बकरी पहाड़ी गुफा में रहती थी। दो भेड़िए उसे सुरक्षित दरवाज़े से दूर बुलाते रहते। वह नम्रता से सुनती, पर जंगल में कदम रखने से पहले उनकी बात परखती थी।
पन्ना या चर्चा चुनें
पन्ना 2

सुबह एक भेड़िया बहुत परेशान बनकर आया। बोला, “मेरा साथी बहुत बीमार है। मदद करो।” बकरी को चिंता हुई, पर याद था कि इन पड़ोसियों पर पहले भरोसा नहीं हुआ था।
पन्ना 3

उसने सुरक्षित दूरी से देखने को माना। संदेश लाने वाले से बोली, “तुम आगे चलो।” वे धीरे ढलान पर चढ़े। दूसरा भेड़िया पेड़ के नीचे स्थिर पड़ा था और इंतज़ार कर रहा था।
पन्ना 4

बकरी के पहुँचने से पहले लेटे भेड़िए ने उत्सुकता से सिर उठाया। आँखें चौकन्नी थीं और पैर उसकी ओर सरके। बकरी तुरंत रुक गई। निमंत्रण में छिपी चाल समझ गई थी।
पन्ना 5

वह मुड़कर गुफा में लौटी। भेड़िए योजना बिगड़ने का दोष एक-दूसरे को देने लगे। बकरी को सब साबित करने की जरूरत नहीं थी। एक साफ चेतावनी लौटने के लिए काफी थी।
पन्ना 6

कुछ दिन बाद वही संदेश वाला फिर आया। बोला, “तुम्हारे आने से वह ठीक हुआ। जश्न मनाने आओ।” बकरी ने कहानी का जल्दी बदलना देखा और उत्तर सोचकर देने लगी।
पन्ना 7

तीन कुत्ते दरवाज़े पर आए तो बकरी बोली, “मित्रों के साथ आ सकती हूँ। तारा, मोती और चार-आँख मजबूत और चौकन्ने हैं।” सुरक्षा वाला समूह सोचते ही भेड़िए की स्वागत वाली मुस्कान गायब हुई।
पन्ना 8

भेड़िए को अचानक दूसरा काम याद आया और वह चला गया। फिर कोई लुभावना निमंत्रण लेकर नहीं आया। बकरी शांत रही। उसने सावधानी और नम्र आवाज़ दोनों बचाए रखे थे।
पन्ना 9

बाद में बकरी खुले पहाड़ पर सच्चे मित्रों से मिली। उन्होंने प्यार से स्वागत कर कहानी सुनी। भरोसे वाले साथ में वह छिपी चाल की चिंता बिना हरी घास खा सकती थी।
पन्ना 10

उसे दूसरों की जरूरत का खयाल था। लेकिन दयालु होने का मतलब चेतावनी भूलना नहीं था। उसने फिर पूछना, ध्यान से देखना और सुरक्षित जवाब चुनना सीख लिया था।
About this Neutoons edition
Original bilingual retelling; previous predation is omitted and the wolf pretends to be ill rather than dead. The goat checks claims and plans a group visit.
Source tradition: Indian Jataka tale. Based on “The Wise Goat and the Wolf” in More Jataka Tales, retold by Ellen C. Babbitt (The Century Co., 1922). Explore the source.
Neutoons English and Hindi text. AI-generated illustrations. This edition has still illustrations. The ten-page edition has no audio narration.



