तीन मछलियों की राह
सावधान मछली दो मित्रों को जाल से बचाकर सुरक्षित पानी में ले जाती है।
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बड़ों के लिए कहानी का नोट
Read together and discuss the characters’ choices. This adaptation softens threatening moments and does not reproduce the source illustrations.
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नदी के शांत मोड़ में तीन मछलियाँ रहती थीं। चाँदी वाली विचारशील सवाल पूछती, नीली बेपरवाह रोमांच खोजती और सुनहरी अति-विचारशील अनजान जगह जाने से पहले पानी को ध्यान से देखती थी।
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एक दिन वे बहाव के साथ नगर पहुँचीं। किनारों से भोजन तैरता आया और पुल की ठंडी छाया मिली। बेपरवाह रुकना चाहती थी। अति-विचारशील ने पास बँधी मछली पकड़ने की नावें देखीं।
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उसने चेताया, “यहाँ जाल हैं। पुराना मोड़ सुरक्षित है।” दूसरों ने कल लौटने का वादा किया। कल फिर स्वादिष्ट भोजन आया और उन्होंने एक बार फिर घर लौटने की यात्रा टाल दी।
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सुबह विचारशील और बेपरवाह नरकट में तेजी से निकलीं। रास्ते में फैला महीन जाल नहीं देखा। दोनों उसमें घुस गईं और उसकी सिलवटों में फँसकर आगे नहीं निकल पाईं।
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अति-विचारशील समय पर रुक गई। मजबूत धागे नहीं धकेल सकती थी। किनारे से मछुआरा देख रहा था। उसे ऐसी योजना चाहिए थी जिससे मछुआरा खुद जाल ढीला कर दे।
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वह ऊपर की ओर तैरी और एक किनारे के पार तेज छपाछप की। मछुआरा लहरों की ओर मुड़ा। पास से देखने से पहले वह नरकट के नीचे से दूसरी ओर निकल गई।
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अब उसने नीचे की ओर छपाछप करके बुलबुले छोड़े। मछुआरे को लगा मछलियाँ दोनों ओर से निकल गईं। धागे टूटे हैं या नहीं देखने के लिए उसने जाल का एक कोना उठाया।
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उठे कोने से जाल के नीचे रास्ता खुला। विचारशील और बेपरवाह तुरंत निकल गईं। अति-विचारशील नरकट के पार मिली। वहाँ तीनों साथ सुरक्षित होकर आराम से साँस लेने लगीं।
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विचारशील बोली, “हमने नहीं सुना, फिर भी तुमने मदद की।” बेपरवाह ने माना कि एक और कल तक रुकना बहुत देर है। वे रस्सियों और नावों से दूर रहकर तुरंत ऊपर लौटीं।
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पुराने मोड़ पर साफ पानी के ऊपर नरकट हिल रहे थे। अब तीनों खोजने से पहले ध्यान से देखतीं। मित्र की चेतावनी कल याद रखने का वादा नहीं, आज सोचने की बात बन गई।
About this Neutoons edition
An original ten-page English and Hindi retelling of the named traditional story. Dialogue and descriptive details are newly written.
Source tradition: Indian Jataka tale. Based on “The Three Fishes” in More Jataka Tales, retold by Ellen C. Babbitt (The Century Co., 1922). Explore the source.
Neutoons English and Hindi text. AI-generated illustrations. This edition has still illustrations. The ten-page edition has no audio narration.



