बंदर सरदार का पुल
दयालु सरदार डालियों के बीच रास्ता बनाकर अपने दल की रक्षा करता है।
मुफ़्त पढ़ें · दस सचित्र पन्ने · खाते की ज़रूरत नहीं
बड़ों के लिए कहानी का नोट
Read together and discuss the characters’ choices. This adaptation softens threatening moments and does not reproduce the source illustrations.
पन्ना 1

नदी के पास बंदरों का दल बड़े आम के पेड़ पर रहता था। मजबूत डालियाँ सोने की जगह थीं। पके फल किनारे और बहते पानी में गिरते रहते थे।
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पन्ना 2

नीचे की ओर राजा को नाव के पास तैरता आम मिला। मीठा फल चखकर वह पेड़ खोजने लगा। वन के जानकार उसे नदी के साथ ऊपर की ओर ले गए।
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वे आम के नीचे पहुँचे और गिरे फल उठाए। राजा को जगह पसंद आई तो वहीं पड़ाव की तैयारी की। उन्हें पता नहीं था कि पेड़ किसी और का घर भी था।
पन्ना 4

कुछ देर बाद बंदर खाने लौटे। आवाज़ पर रक्षकों का ध्यान गया और वे तने के आसपास खड़े हुए। डरे बंदर डालियों पर जुटे। वे रास्ता जानने के लिए सरदार को देखने लगे।
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सरदार ने नदी की छोटी धारा के पार दूसरा पेड़ देखा। डालियाँ लगभग मिलती थीं, पर छोटे बंदरों के लिए अंतर बड़ा था। उसने सुरक्षित जोड़ बनाने का रास्ता सोचा।
पन्ना 6

उसने एक हाथ से सामने की डाल पकड़ी। पैर और दूसरा हाथ अपनी मजबूत डाल पर टिकाए। उसकी ताकतवर पीठ छोटे अंतर पर फैली। दोनों पेड़ों के बीच जीवित पुल बन गया।
पन्ना 7

उसने कहा, “धीरे पार जाओ।” छोटे बंदर एक-एक करके पीठ पर चले और दूसरी डाल पहुँचे। सबसे छोटे के सुरक्षित होने तक सरदार मजबूती से अपनी जगह टिका रहा।
पन्ना 8

राजा ने उसका धीर साहस देखा। रक्षकों से पीछे हटने और मजबूत कपड़ा लाने को कहा। उन्होंने दल को भगाने की जगह थके सरदार को धीरे नीचे उतारने में मदद की।
पन्ना 9

राजा ने पानी दिया और बंदरों का घर सुरक्षित रखने का वादा किया। दल पास आकर सरदार को धीरे पुकारने लगा। वह पेड़ तले आराम करता रहा और चिंता खुशी में बदल गई।
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उसके बाद यात्री सिर्फ गिरे आम लेते और दल के लिए खूब छोड़ते। सरदार के पुल ने सिर्फ बंदर पार नहीं किए थे। उसने राजा के मन में भी दया पहुँचा दी थी।
About this Neutoons edition
Original bilingual retelling; threatening guards lower their bows without attack. The bridge spans a narrow gap between supported branches, and the chief is cared for afterward.
Source tradition: Indian Jataka tale. Based on “How the Monkey Saved His Troop” in More Jataka Tales, retold by Ellen C. Babbitt (The Century Co., 1922). Explore the source.
Neutoons English and Hindi text. AI-generated illustrations. This edition has still illustrations. The ten-page edition has no audio narration.



