नाटकघर में लोमड़ी
जिज्ञासु लोमड़ी सुंदर चेहरे के पीछे भी देखती है।
मुफ़्त पढ़ें · दस सचित्र पन्ने · खाते की ज़रूरत नहीं
बड़ों के लिए कहानी का नोट
An original child-friendly adaptation of an Aesop fable. Read together and discuss the choices rather than treating animal behaviour as a rule about people.
पन्ना 1

नारंगी लोमड़ी फड़फड़ाहट सुनकर खाली नाटकघर में आई। हवा से पर्दा हिल रहा था। पीछे कपड़ों, ढोलों और रंगीन सामान की शेल्फ थीं।
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ऊँची शेल्फ से रंगीन चेहरा देखता लगा। चमकीली आँखें और बड़ी मुसकान थीं। लोमड़ी रुकी। क्या कपड़ों के बीच कोई छिपा था?
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उसने दूर से नमस्ते कहा। चेहरा न बोला, न पलक हिली। पर्दा फिर फड़फड़ाया। बाकी कमरा उसी तरह शांत रहा।
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पास जाकर लोमड़ी ने पीछे फीता देखा। चेहरा हुक से लटका था। जो मेहमान लगा था, वह नाटक का मुखौटा निकला।
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उसने धीरे मुखौटा उठाकर पलटा। पीछे खोखला था, जहाँ कलाकार का चेहरा आएगा। आगे का अद्भुत भाव सिर्फ रंगों से बना था।
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लोमड़ी ने नाटक में मुखौटा पहनने की कल्पना की। वह खुद अच्छे शब्द या जवाब नहीं चुन सकता। पहनने वाला यह काम करेगा।
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मुखौटा वापस टाँगकर उसने साधारण कठपुतली देखी। वह उतनी चमकीली नहीं थी, मगर जोड़ बता रहे थे कि उसे कैसे चलाया जा सकता है।
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कमरे में जीवित जैसे लगने वाले निर्जीव सामान थे। लोमड़ी उन हाथों और विचारों को समझने लगी जो इन्हें नाटक में साथ जीवंत करेंगे।
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बाहर झाड़ू लिए देखभाल करने वाला आया। लोमड़ी ने सुंदर सामान के लिए धन्यवाद दिया। सुंदरता के साथ अच्छे नाटक के पीछे की सोच भी महत्वपूर्ण थी।
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शाम को लोमड़ी ने घास पर बैठकर कठपुतली-नाटक देखा। सुंदर चेहरे पसंद आए, कहानी भी सुनी। रोचक होने के लिए सिर्फ सुंदर दिखना काफी नहीं।
About this Neutoons edition
Expanded original bilingual retelling of the cited fable; dialogue and setting details are newly written.
Source tradition: Aesop. Based on “The Fox and the Mask” in The Fables of Aesop, selected and told anew by Joseph Jacobs (Macmillan, 1894). Explore the source.
Neutoons English and Hindi text. AI-generated illustrations. This edition has still illustrations. The ten-page edition has no audio narration.



