लोमड़ी और ऊँचे अंगूर
लोमड़ी अपनी निराशा को ईमानदारी से समझना सीखती है।
मुफ़्त पढ़ें · दस सचित्र पन्ने · खाते की ज़रूरत नहीं
बड़ों के लिए कहानी का नोट
An original child-friendly adaptation of an Aesop fable. Read together and discuss the choices rather than treating animal behaviour as a rule about people.
पन्ना 1

नाश्ते के बाद लोमड़ी बाग में घूम रही थी। वह सेब सूँघती और मधुमक्खियाँ सुनती चली। ऊँची जाली पर बैंगनी अंगूर चमक रहे थे।
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पन्ना 2

अंगूर गोल और रसीले लग रहे थे। हरी पत्तियाँ उनके चारों ओर थीं। गरम सुबह में मीठे फल खाने का मन हुआ।
पन्ना 3

लोमड़ी पिछले पैरों पर खड़ी होकर नाक ऊपर ले गई। अंगूर दूर रहे। कान से एक पत्ती छुई, पर फल नहीं गिरा।
पन्ना 4

वह झुकी और उछली। पल भर अंगूरों के नीचे हवा में रही। फिर घास पर उतरी। सारे अंगूर डंठल पर ही थे।
पन्ना 5

सेब के पेड़ से दौड़कर उसने लंबी छलाँग लगाई। पंजे पगडंडी पर दौड़े। इस बार ऊँची उछली, फिर भी अंगूर दूर रहे।
पन्ना 6

उसने दूसरी ओर से कोशिश की, फिर सामने से। उतरते समय थोड़ी धूल उड़ी। साँस तेज़ हुई और पूँछ धीरे झुक गई।
पन्ना 7

आखिर वह छाँव में बैठी। अंगूर वहीं थे। जाली पर चढ़ना सुरक्षित नहीं था। अब दूसरा उपाय या दूसरा नाश्ता चुनना था।
पन्ना 8

लोमड़ी ने नाक उठाकर कहा, शायद अंगूर खट्टे होंगे। वह धीरे चल दी, मानो उन्हें कभी खाना ही नहीं चाहती थी।
पन्ना 9

हवा से बेल हिली। फाटक के पास लोमड़ी रुक गई। उसने एक भी अंगूर नहीं चखा था। फिर खट्टे होने का पता कैसे चला?
पन्ना 10

उसने माना कि वह निराश थी। फिर रास्ते का गिरा सेब उठाया। दूर के अंगूरों में दोष खोजने से अपनी भावना समझना बेहतर लगा।
About this Neutoons edition
Original bilingual expansion of the unreachable-grapes fable; adds an honest reflection and an alternative snack after the traditional dismissive remark.
Source tradition: Aesop. Based on “The Fox and the Grapes” in The Fables of Aesop, selected and told anew by Joseph Jacobs (Macmillan, 1894). Explore the source.
Neutoons English and Hindi text. AI-generated illustrations. This edition has still illustrations. The ten-page edition has no audio narration.



