कौआ और चालाक तारीफ़
कौआ सीखता है कि तारीफ़ सुनकर भी सोच लेना चाहिए।
मुफ़्त पढ़ें · दस सचित्र पन्ने · खाते की ज़रूरत नहीं
बड़ों के लिए कहानी का नोट
An original child-friendly adaptation of an Aesop fable. Read together and discuss the choices rather than treating animal behaviour as a rule about people.
पन्ना 1

टोकरी के पास कौए को पनीर का छोटा टुकड़ा मिला। वह उसे मज़बूत डाल पर ले गया, ताकि आराम से नाश्ता कर सके।
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पन्ना 2

नारंगी लोमड़ी नीचे से गुज़री। हवा सूँघकर उसने पनीर देखा और रुक गई। कौआ उसके पंजों की पहुँच से बहुत ऊपर था।
पन्ना 3

लोमड़ी बातचीत के बहाने बैठ गई। उसने चमकीले पंखों और आँखों की तारीफ़ की। लेकिन उसकी नज़र बार-बार पनीर पर जाती थी।
पन्ना 4

कौए ने थोड़ा सिर उठाया। अपने पंखों की तारीफ़ उसे अच्छी लगी। उसने डाल पर पैर सँभाले। पनीर अब भी चोंच में था।
पन्ना 5

लोमड़ी बोली, इतने सुंदर पक्षी की आवाज़ भी सुरीली होगी। क्या एक सुर सुनाओगे? शांत जंगल मानो उसके जवाब की प्रतीक्षा करने लगा।
पन्ना 6

कौआ नाश्ता भूल गया। उसने ज़ोर से काँव करने को चोंच खोली। पनीर पत्तियों के बीच से नीचे बैठी लोमड़ी की ओर गिरा।
पन्ना 7

लोमड़ी ने पनीर पकड़ लिया और हट गई। तारीफ़ तुरंत बंद हो गई। कौए ने खाली चोंच और नीचे के नाश्ते को देखा।
पन्ना 8

कौए को समझ आया कि लोमड़ी गीत क्यों चाहती थी। मीठी बातों से उसे पनीर मिल गया था। वे दोस्ती का वादा नहीं थीं।
पन्ना 9

कौए ने अपनी पसंद से हल्की काँव की। लोमड़ी दूर चली गई। अगली बार वह मीठी तारीफ़ का जवाब देने से पहले खाना खा लेगा।
पन्ना 10

दूसरे नाश्ते की खोज में वह मैदान की ओर उड़ गया। पंख अब भी चमकते थे। अच्छी बात पसंद करते हुए भी कहने वाले का उद्देश्य समझा जा सकता है।
About this Neutoons edition
Expanded original bilingual retelling of the cited fable; dialogue and setting details are newly written.
Source tradition: Aesop. Based on “The Fox and the Crow” in The Fables of Aesop, selected and told anew by Joseph Jacobs (Macmillan, 1894). Explore the source.
Neutoons English and Hindi text. AI-generated illustrations. This edition has still illustrations. The ten-page edition has no audio narration.



