झील की दयालुता वाली पहेली
तीन भाई समझते हैं कि बड़े जवाब से अधिक दयालु मन मायने रखता है।
मुफ़्त पढ़ें · दस सचित्र पन्ने · खाते की ज़रूरत नहीं
बड़ों के लिए कहानी का नोट
Read together and discuss the characters’ choices. This adaptation softens threatening moments and does not reproduce the source illustrations.
पन्ना 1

तीन भाई राज्य को समझने पिता के महल से निकले। तारा आगे चला, चंद्र भोजन उठाए था और प्रसन्न सूर्य जंगल के रास्ते में हर उड़ती तितली देख रहा था।
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दोपहर तक नरकट से घिरी सुंदर झील मिली। तारा और चंद्र पेड़ के नीचे बैठे। सूर्य सबके लिए ठंडा पानी लाने की आशा में प्याले लेकर किनारे गया।
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नरकट के पास जल-परी निकली। बोली, “पानी लेने से पहले बताओ कि सच में अच्छे लोग कैसे होते हैं।” सूर्य ने तुरंत कहा, “वे सूरज और चाँद जैसे चमकते हैं!”
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जल-परी ने सिर हिलाया और सूर्य को जादुई प्रतीक्षा मंडप में बैठाया। चंद्र खोजने आया तो बोला, “वे आकाश जैसे ऊँचे होते हैं।” वह भी भाई के साथ बैठ गया।
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तारा ने झील की ओर जाते पदचिह्न देखे, लौटते नहीं। वह सूखी जमीन पर खड़ा होकर भाइयों को पुकारने लगा। उसके सावधान कदम देखकर जल-परी सामने आ गई।
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उसने बताया, “तुम्हारे भाई सुरक्षित हैं। वे पहेली का उत्तर नहीं दे पाए।” तारा ने सवाल सुना। आकाश देखने के बजाय उसने सोचा कि लोग एक-दूसरे से कैसे व्यवहार करते हैं।
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उसने कहा, “अच्छे लोग मीठे बोलते और दयालु काम करते हैं। कोई देख न रहा हो तब भी दूसरों का खयाल रखते हैं।” जल-परी मुस्कराई। यह उत्तर मन का था, रूप का नहीं।
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जल-परी ने दोनों भाइयों को मंडप के द्वार बुलाया। बोली, “एक को घर ले जा सकते हो।” तारा ने छोटे सूर्य को चुना, पर चंद्र सुरक्षित होने तक वहीं रहना चाहा।
पन्ना 9

जल-परी ने समझा कि उसकी दयालुता सच्ची है। उसने दोनों भाइयों को छोड़ा और प्याले भरे। चंद्र और सूर्य ने तारा को गले लगाया। उसने किसी को पीछे नहीं छोड़ा था।
पन्ना 10

शाम के पेड़ों के नीचे भोजन बाँटकर उन्होंने यात्रा जारी की। हर गाँव में तारा को झील की सीख याद रही। दयालु उत्तर तब मजबूत बना जब उसके साथ दयालु काम हुआ।
About this Neutoons edition
Original bilingual adaptation; dynastic threats and abduction are replaced by a journey and an enchanted waiting pavilion. The ethical riddle and eldest brother’s compassion are retained.
Source tradition: Indian Jataka tale. Based on “The Princes and the Water-Sprite” in Jataka Tales, retold by Ellen C. Babbitt (The Century Co., 1912). Explore the source.
Neutoons English and Hindi text. AI-generated illustrations. This edition has still illustrations. The ten-page edition has no audio narration.



