छोटी पूँछ वाली लोमड़ी
लोमड़ी सीखती है कि साथ रहने के लिए सबका एक जैसा होना ज़रूरी नहीं।
मुफ़्त पढ़ें · दस सचित्र पन्ने · खाते की ज़रूरत नहीं
बड़ों के लिए कहानी का नोट
An original child-friendly adaptation of an Aesop fable. Read together and discuss the choices rather than treating animal behaviour as a rule about people.
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पुरानी दुर्घटना में लोमड़ी की अधिकांश पूँछ गई थी। अब वह ठीक थी। फिर भी दोस्तों के मिलने पर अलग दिखने की चिंता होती थी।
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कई दिन वह जंगल की बैठक में नहीं गई। दोस्त खोजते थे। वह उनके आश्चर्य की कल्पना करके खुद ही अधिक झेंपती रही।
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आखिर उसने अपनी बैठक बुलाई। सपाट पत्थर पर खड़े होकर कहा कि लंबी पूँछ परेशानी है। सब उसकी तरह छोटी पूँछ पर विचार करें।
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उसने कहा, लंबी पूँछ घास छूती, पत्ते पकड़ती और सँवारना पड़ता है। वह चाहती थी कि अपनी पूँछ के सवाल से पहले दोस्त मान जाएँ।
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बूढ़ी लोमड़ी ने पूछा, दुर्घटना से पहले भी यही सलाह देती? छोटी पूँछ वाली चुप हुई और पंजों के नीचे घास देखने लगी।
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उसने माना कि सब उसी जैसे दिखें तो अलग नहीं लगेगा। यही असली कारण था। गिनाई परेशानियाँ पूरी बात नहीं थीं।
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दोस्तों ने कहा, दोस्ती के लिए शरीर बदलना ज़रूरी नहीं। उनकी लंबी पूँछों के बीच छोटी भी स्वीकार थी। कमी उसकी संगत की थी, पूँछ की नहीं।
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लोमड़ी ने राहत पाकर अपनी इच्छा को सलाह बनाकर पेश करने की माफी माँगी। सलाह में बताना चाहिए कि फायदा किसे और क्यों होगा।
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वे साथ जंगल चले। एक ने लंबी पूँछ से पत्ते झाड़े। छोटी पूँछ वाली आसानी से सँकरी झाड़ी से गई। अलग आकारों के अलग अनुभव थे।
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अगली बैठक में उसने पूँछों के बजाय नए बेरों की बात की। सबका उसके जैसा होना ज़रूरी नहीं लगा। साथ में दिखने वाले फर्क की भी जगह थी।
About this Neutoons edition
Preserves personal-interest advice exposed by another fox; omits injury/trap depiction, clarifies acceptance and refuses any suggestion of changing bodies to fit in.
Source tradition: Aesop. Based on “The Fox Without a Tail” in The Fables of Aesop, selected and told anew by Joseph Jacobs (Macmillan, 1894). Explore the source.
Neutoons English and Hindi text. AI-generated illustrations. This edition has still illustrations. The ten-page edition has no audio narration.



