छोटी मछली और बड़ा वादा
मछुआरा ऐसे वादे पर सोचता है जिसकी गारंटी कोई नहीं दे सकता।
मुफ़्त पढ़ें · दस सचित्र पन्ने · खाते की ज़रूरत नहीं
बड़ों के लिए कहानी का नोट
An original child-friendly adaptation of an Aesop fable. Read together and discuss the choices rather than treating animal behaviour as a rule about people.
पन्ना 1

मछुआरा छोटी टोकरी लेकर साफ नदी के पास बैठा था। वह सुबह से शांत प्रतीक्षा कर रहा था। सरकंडे हिलते और व्याध-पतंगे पानी पर उड़ते थे।
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पन्ना 2

आखिर छोटी चाँदी जैसी मछली मिली। उसने नदी किनारे गीले जाल में धीरे रखा। जिस भोजन की उम्मीद थी, उससे यह बहुत छोटी थी।
पन्ना 3

कथाओं की तरह मछली बोली। मुझे बढ़ने दो, उसने कहा। बड़ी होने पर फिर पकड़ लेना; तब तुम्हें अधिक खाना मिलेगा।
पन्ना 4

मछुआरे ने सोचा। बड़ी मछली उपयोगी होगी, मगर यह लौटने का वादा कैसे करे? नदी बड़ी थी और भविष्य की पकड़ निश्चित नहीं थी।
पन्ना 5

उसने कहा, अभी रखने और बाद में मिलने की आशा अलग बातें हैं। मछली ने पूँछ हिलाई। वह नदी में जीना और बढ़ना चाहती थी।
पन्ना 6

उसने आकार देखा। वादे से अलग सवाल था: क्या इतनी छोटी मछली रखना ठीक है? उसने टोकरी पर छोटा माप-चिह्न देखा।
पन्ना 7

उसके सावधान नियम में मछली बहुत छोटी थी। उसने इसी कारण छोड़ना तय किया, भविष्य में बड़ी पकड़ की गारंटी के कारण नहीं।
पन्ना 8

उसने गीला जाल उथले पानी में झुकाया। मछली तैर गई। चाँदी की चमक सरकंडों के बीच गई। मछुआरे ने लहरें शांत होते देखीं।
पन्ना 9

टोकरी खाली रही, लेकिन निर्णय साफ था। उसने निश्चित भोजन के बदले पक्की भविष्य की दावत नहीं ली। छोटे जीव को बढ़ने की जगह दी।
पन्ना 10

घर में परिवार के साथ उसने साधारण सब्ज़ी का भोजन किया। मछली के आशा भरे वादे और एक काम के अलग कारणों की बात बताई।
About this Neutoons edition
Preserves small fish’s uncertain bigger-later offer and fisher’s reasoning; deliberately changes refusal to safe release under his size rule. Does not present a fictional rule as fishing law.
Source tradition: Aesop. Based on “The Fisher and the Little Fish” in The Fables of Aesop, selected and told anew by Joseph Jacobs (Macmillan, 1894). Explore the source.
Neutoons English and Hindi text. AI-generated illustrations. This edition has still illustrations. The ten-page edition has no audio narration.



