कुत्ता और नदी का आईना
कुत्ता पानी की परछाईं को दूसरा नाश्ता समझ लेता है।
मुफ़्त पढ़ें · दस सचित्र पन्ने · खाते की ज़रूरत नहीं
बड़ों के लिए कहानी का नोट
An original child-friendly adaptation of an Aesop fable. Read together and discuss the choices rather than treating animal behaviour as a rule about people.
पन्ना 1

दुकान पर साथ देने के बाद बेकर ने सुनहरे कुत्ते को रोटी दी। वह गर्व से उसे लेकर धारा के शांत रास्ते से घर चला।
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पन्ना 2

रास्ते में लकड़ी का छोटा पुल था। पटरे मज़बूत और सूखे थे। कुत्ता सँभलकर चढ़ा। गरम रोटी अब भी दाँतों के बीच थी।
पन्ना 3

बीच में उसने साफ पानी देखा। एक और सुनहरा कुत्ता उसे देख रहा था। उसके मुँह में भी बिल्कुल उसी जगह रोटी थी।
पन्ना 4

कुत्ते ने सिर झुकाया; दूसरे ने भी झुकाया। छोटी लहर से नीचे की रोटी बड़ी लगी। उसने सोचा, क्या दोनों नाश्ते मिल सकते हैं?
पन्ना 5

दूसरे को भौंकने के लिए उसने मुँह खोला। आवाज़ से पहले अपनी रोटी छूट गई। वह पुल के बगल से पानी में गिर पड़ी।
पन्ना 6

छप! रोटी गिरते ही परछाईं चमकते टुकड़ों में बिखरी। न दूसरा कुत्ता रहा, न दूसरा नाश्ता। उसकी रोटी धारा में बहने लगी।
पन्ना 7

कुत्ता पानी में कूदने के बजाय सुरक्षित पुल पर रहा। रोटी दूर चली गई। उसे दुख हुआ। काश वह पहले थोड़ा सोच लेता।
पन्ना 8

पानी शांत हुआ तो चेहरा फिर दिखा। उसने पूँछ हिलाई; परछाईं ने भी हिलाई। अब उसने देखा कि हर हरकत बिल्कुल एक जैसी थी।
पन्ना 9

कुत्ता समझ गया कि नदी आईना बनी थी। वह धीरे घर चला। काल्पनिक नाश्ते के लालच में उसने अपना अच्छा नाश्ता खो दिया था।
पन्ना 10

शाम को दरवाज़े के पास उसने रोज़ का खाना खाया। गड्ढे में दूसरा कटोरा दिखा तो पूँछ हिलाई। उसे अपना असली भोजन पहचानना आ गया था।
About this Neutoons edition
Uses a bread roll instead of meat; preserves reflection mistake and lost food, with explicit safe behaviour near water.
Source tradition: Aesop. Based on “The Dog and the Shadow” in The Fables of Aesop, selected and told anew by Joseph Jacobs (Macmillan, 1894). Explore the source.
Neutoons English and Hindi text. AI-generated illustrations. This edition has still illustrations. The ten-page edition has no audio narration.



