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Neutoons

Jataka · 8 min read · Ages 4+

खरगोश और ज़ोर की धमक

एक अचानक आई आवाज़ से पूरा जंगल दौड़ पड़ता है। खरगोश और शेर लौटकर देखते हैं कि हुआ क्या था।

मुफ़्त पढ़ें · दस सचित्र पन्ने · खाते की ज़रूरत नहीं

बड़ों के लिए कहानी का नोट

A sudden noise frightens the animals, followed by reassurance. No loud sound effects.

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झपकी लेने की जगह

Hare nudges a twig aside and settles while a little beetle crosses a root.

खरगोश को ताड़ के नीचे ठंडी जगह मिली। दोपहर गर्म थी। वह जंगल के किनारे नरम घास खोजता रहा था और अब उसके पंजे थक गए थे।

वह छाया में एक बार घूमा, चुभती टहनी हटाई और कान पीछे टिकाकर लेट गया। उसके पीछे एक गड्ढे में सूखे पत्ते जमा थे। ऊपर कई भारी नारियल लटके थे।

खरगोश ने एक भुनगे को जड़ पर चढ़ते देखा। वह फिसला, फिर कोशिश की और दूसरी ओर पहुँच गया। खरगोश की आँखें बंद होने लगीं। आसपास जंगल की दोपहर हमेशा की तरह बीत रही थी।

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पीछे से आई आवाज़

One coconut falls behind sleeping Hare, lands and settles; Hare reacts after impact and bounds away.

हवा से ताड़ के पत्ते हिले। एक पका नारियल छूटा और खरगोश के पीछे सूखे पत्तों वाले गड्ढे में गिरा।

धम्म!

खरगोश उछलकर खड़ा हो गया। उसे नींद आने ही वाली थी, इसलिए अचानक हुई आवाज़ बहुत बड़ी लगी। उसके नीचे पत्ते खड़खड़ाए। दिल तेज़ धड़कने लगा।

“धरती टूट रही है!” वह चिल्लाया।

पीछे देखने से पहले ही वह दौड़ पड़ा। चौड़े रास्ते की ओर भागते हुए जड़ें और पत्ते पीछे छूटते गए। उधर नारियल अपनी जगह पड़ा था। पेड़ खड़ा था। ज़मीन नहीं हिली थी। लेकिन खरगोश अब इतना दूर था कि कुछ देख नहीं सकता था।

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रास्ते में फैलती बात

Two hares, Deer and Elephant exchange the alarming story and prepare to leave.

दूसरे खरगोश ने उसे दौड़ते देखा। “क्या हुआ?”

“ताड़ के पास धरती टूट रही है!”

दूसरा खरगोश भी पीछे दौड़ा। अगले मोड़ पर हिरण ने चेतावनी सुनी और साथ हो लिया।

“तुम्हें किसने बताया?” हिरण ने पूछा।

“खरगोश ने!” दूसरे खरगोश ने आगे इशारा किया।

थोड़ी देर में हाथी रास्ते पर आया। उसने दौड़ता हिरण देखा और वही डरावनी बात सुनी। छोटे जानवरों से पैर बचाकर वह भी पीछे चल पड़ा।

हर नया साथी समझ रहा था कि आगे किसी ने खतरा देखा होगा। पीछे भागते पैरों की आवाज़ सुनकर पहले खरगोश को और यकीन हो गया कि कोई बड़ी मुसीबत पीछे आ रही है। किसी ने मुड़कर नहीं देखा।

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रुकने की जगह

Lion calmly invites Hare to stop and explain the noise.

घास वाली पहाड़ी के पास शेर आराम कर रहा था। जानवरों को आते देखकर वह खड़ा हुआ, लेकिन उनके रास्ते से दूर रहा।

“यहाँ खुली जगह है,” उसने पुकारा। “तुम आराम से रुक सकते हो।”

पहले हिरण धीमा हुआ। खरगोश कुछ छलाँगें और लगाकर उसके पास रुके। हाथी पीछे आकर ठहरा। सबकी साँस तेज़ चल रही थी।

“धरती टूट रही है!” हिरण ने कहा।

शेर ने ताड़ की ओर देखा। पेड़ खड़े थे और पक्षी हमेशा की तरह उड़ रहे थे।

“यह कहाँ शुरू हुआ?” उसने पूछा।

जानवर एक-दूसरे को देखने लगे। सभी दौड़ रहे थे। किसी ने याद नहीं रखा था कि खबर सबसे पहले कहाँ से आई।

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किसने देखा था?

Lion lowers his head patiently and listens to Hare's uncertain explanation.

“क्या तुमने धरती टूटते देखी?” शेर ने हाथी से पूछा।

“मुझे हिरण ने बताया।”

हिरण ने सिर हिलाया। “मैंने खरगोशों से सुना।”

दूसरे खरगोश ने धीरे से पहले की ओर इशारा किया। अब सब खरगोश को देख रहे थे। उसका मन कहीं छिप जाने का हुआ।

“मैंने पीछे बहुत ज़ोर की धमक सुनी,” उसने फुसफुसाया।

“और देखा क्या?”

खरगोश को छाया, भुनगा और अचानक आई आवाज़ याद आई। “मैंने देखा नहीं।”

शेर घास पर बैठ गया। “उस आवाज़ से तुम डर गए थे। चलो, देखते हैं वह किससे हुई।”

खरगोश के कान थोड़े उठे। “तुम मेरे साथ चलोगे?”

“हाँ।”

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उसी रास्ते से वापस

Hare pauses at a twig on the return path; Lion waits while he takes a careful step.

बाकी जानवर खुली घास पर रुके। खरगोश और शेर जंगल में वापस चले। इस बार चाल बहुत धीमी थी।

गिरी हुई डाल के पास खरगोश रुक गया। शेर भी रुका।

“पहले यहीं से देख सकते हैं,” उसने कहा।

खरगोश ने सुना। एक पक्षी बोला। हवा में पत्ते हिले। उनके पीछे आने की कोई आवाज़ नहीं थी।

वे आगे चले। खरगोश ने एक झाड़ी पहचानी, फिर सोने की जगह के पास वाली मुड़ी जड़। सामने ताड़ का पेड़ खड़ा था।

“मैं वहाँ लेटा था,” उसने कहा।

शेर रुका रहा। जब खरगोश तैयार हुआ, तभी दोनों आखिरी कुछ कदम आगे बढ़े। वे बगल से उस जगह के पास पहुँचे।

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गड्ढे में नारियल

Hare and Lion inspect the coconut and the solid ground beneath the palm.

ताड़ का पेड़ अपनी जगह था। जड़ के पास कोई बड़ी दरार नहीं थी। खरगोश ने ज़मीन पर एक पंजा रखा। वह मज़बूत थी।

उसकी सोने की जगह के पीछे सूखे पत्तों में आधा दबा नारियल पड़ा था। गिरने की जगह पर ताज़ा निशान था।

शेर ने ऊपर पेड़ देखा, फिर नीचे गड्ढा। “आवाज़ तुम्हारे पीछे हुई थी?”

खरगोश ने सिर हिलाया।

“यहाँ?”

“हाँ। ठीक यहाँ।”

खरगोश नारियल के आसपास चला। वह साधारण भूरा नारियल था। उससे रेशे का एक टुकड़ा निकला था। उसने ऐसे बहुत-से नारियल पहले भी देखे थे। अब उसे समझ आने लगा कि उसने क्या सुना था।

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आवाज़ को समझना

Lion gently nudges the coconut into dry leaves while Hare watches and understands.

“क्या मैं इसे हिलाऊँ?” शेर ने पूछा।

खरगोश एक ओर हट गया। “मैं तैयार हूँ।”

शेर ने नारियल धीरे से दूसरे सूखे पत्तों पर लुढ़काया। पत्ते खड़खड़ाए और हल्की धमक हुई।

खरगोश के कान फड़के, लेकिन इस बार वह देख रहा था कि हुआ क्या है।

“यही आवाज़ थी,” उसने कहा। “ऊपर से गिरने पर ज़्यादा तेज़ हुई होगी।”

वह बैठ गया और लंबी साँस छोड़ी। “मेरी वजह से सब दौड़े।”

“तुम डर गए थे,” शेर बोला। “अब तुम्हें नई बात पता चली है। उन्हें बता देना चाहिए।”

खरगोश ने रास्ते की ओर देखा। उसका मन ताड़ के नीचे छिपने का था, लेकिन बाकी अभी खबर का इंतज़ार कर रहे थे।

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बाकी सबको बताना

Hare explains the ordinary sound to his relieved companions.

लौटने पर हाथी पहाड़ी के पास ही था। हिरण और दूसरा खरगोश उनसे मिलने उठे।

“ज़मीन सुरक्षित है,” खरगोश ने कहा। “सूखे पत्तों पर नारियल गिरा था। मैंने आवाज़ सुनी, लेकिन भागने से पहले देखा नहीं।”

दूसरे खरगोश ने थका पंजा सहलाया। “मैंने भी नहीं देखा।”

“मैंने भी नहीं,” हिरण बोला।

कोई नहीं हँसा। सबको डर लगा था। हाथी ने घास उठाई और बाकी भी आराम से बैठने लगे।

फिर सबने घर के रास्ते चुने। इस बार खरगोश को पीछे भागती भीड़ के बजाय अलग-अलग कदम सुनाई दे रहे थे। शेर उसे ताड़ के पेड़ों तक छोड़ने गया।

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शाम की पहचानी आवाज़ें

Hare looks down at the beetle moving beside his paw, watches it pass safely, then closes his eyes and rests.

खरगोश ने लटकते नारियलों से थोड़ा दूर नई जगह चुनी। वहाँ से अपना ताड़, जड़ और सूखे पत्तों का गड्ढा दिख रहा था।

“शुभरात्रि,” शेर ने कहा।

“मेरे साथ लौटने के लिए धन्यवाद।”

शेर के जाने पर पंजे के पास कुछ खड़का। खरगोश के कान उठे। उसने देखा। भुनगा एक पत्ते में से रास्ता बना रहा था।

खरगोश उसे जड़ तक पहुँचते देखता रहा। फिर उसने पंजों पर ठुड्डी टिका दी। ऊपर एक पक्षी बोला। दूर हाथी घर जाते हुए घास के बीच से गुज़रा। खरगोश इन आवाज़ों को पहचानता था। उसने आँखें बंद कीं और आराम करने लगा। समाप्त।

About this Neutoons edition

A gentle retelling of the timid-hare tale from the Buddhist Jataka tradition. The hare is reassured, not mocked.

Source tradition: Jataka. Explore the source.

Neutoons English and Hindi text. AI-generated illustrations. Animated illustrations are available in the page-turning reader. The ten-page edition has no audio narration.

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