हाथी और कुत्ता
राजा के बगीचे में दो मित्र रोज़ साथ रहते हैं। अलग होने पर उनकी चुप्पी किसी को रुककर सुननी पड़ती है।
मुफ़्त पढ़ें · दस सचित्र पन्ने · खाते की ज़रूरत नहीं
बड़ों के लिए कहानी का नोट
Friends are briefly separated and reunited. A gentle ending for reading together.
नाश्ते पर एक मेहमान

राजा के बगीचे में हाथी एक फैले हुए पेड़ के नीचे नाश्ता करता था। रखवाला हर सुबह बड़ा बर्तन लाता। जो टुकड़े गिरते, उनके लिए गौरैयाँ पास बैठतीं।
एक दिन छोटा भूरा कुत्ता फाटक से भीतर आया। वह छाया के किनारे रुककर बर्तन के पास पड़े टुकड़ों को देखने लगा।
हाथी ने उसे देख लिया। आगे बढ़ने के बजाय उसने अपना बड़ा पैर पीछे कर लिया।
कुत्ता सावधानी से एक कदम चला, फिर दूसरा। उसने टुकड़े खाए और ऊपर देखा।
हाथी नाश्ता करता रहा। बगीचा इतना शांत था कि कुत्ते को ऊपर हिलते पत्तों की आवाज़ सुनाई दी। बर्तन खाली होने पर भी वह थोड़ी देर वहीं रहा।
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बर्तन के पास की जगह

अगली सुबह कुत्ता फिर आया। हाथी ने नन्हे कदमों की आहट पहचान ली और बर्तन के पास वही जगह छोड़ दी।
जल्द ही कुत्ते ने छाया के किनारे रुकना छोड़ दिया। वह सीधे अपनी जगह आता, पूँछ हिलाता और नाश्ता तैयार होने तक बैठता। रखवाला उसके लिए भी छोटी कटोरी लाने लगा।
खाने के बाद कुत्ते को गिरे पत्ते जाँचना पसंद था। हाथी उसे हर पत्ता उलटते देखता, जैसे हर बार कोई नई चीज़ मिल रही हो।
एक बार पत्ता कुत्ते के कान पर अटक गया। उसने सिर हिलाया तो पत्ता गिरा। हाथी ने सूँड़ से हल्की फूँक मारी। कुत्ते की पूँछ और तेज़ हिलने लगी।
तालाब तक की सैर

उनकी सैर बगीचे के फाटक से शुरू होती। कुत्ता अक्सर पहले पहुँचता और सलाखों के बीच नाक रखकर इंतज़ार करता। हाथी धीरे-धीरे आता।
रास्ते में कुत्ता नई जड़ों को सूँघने रुकता। हाथी पत्तों के लिए ठहरता। बिना पुकारे दोनों एक-दूसरे का इंतज़ार करना सीख गए।
तालाब में हाथी उथले पानी में खड़ा होता। कुत्ता सूखे पत्थर से पानी पीता। हाथी छींटे उड़ाता, तो सूँड़ छोटे मित्र से दूर रखता।
लौटते समय कुत्ता कभी आगे दौड़ जाता। लेकिन मोड़ पर हमेशा पीछे देखता। हाथी दिखाई देता, तो वह फिर उसके आने का इंतज़ार करता।
खेतों के उस पार

एक दोपहर एक आदमी ने फाटक पर बैठे कुत्ते को देखा। उसे छोटा कुत्ता पसंद आया। उसने रखवाले को पैसे देकर उसे घर ले जाने की बात की।
रखवाले ने हाथी के बारे में सोचे बिना हाँ कर दी। उसने कुत्ते को बुलाया, गले के पट्टे से हल्की डोरी बाँधी और आदमी को दे दी।
कुत्ता कुछ कदम चला, फिर पेड़ की ओर मुड़कर देखा। हाथी बगीचे के दूसरे हिस्से में था। उसने उन्हें जाते नहीं देखा।
आदमी कुत्ते को तालाब और खेतों के पार अपने घर ले गया। अनजान घर पहुँचकर कुत्ता दरवाज़े की ओर मुँह करके बैठ गया। उसे नहीं मालूम था कि वापस कब जाएँगे।
खाली जगह

सैर का समय हुआ तो हाथी फाटक पर आया। सलाखों के बीच नाक टिकाए कोई इंतज़ार नहीं कर रहा था।
उसने पेड़ के पीछे देखा, फिर पानी के घड़े के पास। गर्म दोपहर में कुत्ता कभी वहाँ सोता था। जगह खाली थी।
रखवाले ने फाटक खोला, लेकिन हाथी रोज़ की तरह चल नहीं पड़ा। वह लंबी होती छायाओं के बीच सड़क देखता रहा।
अगली सुबह पेड़ के नीचे दो बर्तन रखे थे। हाथी ने सूँड़ के सिरे से छोटी कटोरी छुई। ज़मीन पर हल्की खरखराहट हुई। कोई नन्हे पंजों से दौड़ता नहीं आया। हाथी ने अपना नाश्ता अधूरा छोड़ दिया।
कुछ बदल गया था

रखवाला ताज़े पत्ते लाया। हाथी ने थोड़ा खाया, फिर फाटक की ओर देखने लगा। तालाब पर भी चुप खड़ा रहा और जल्दी लौट आया।
राजा ने सुना कि उसका हाथी उदास है। उसने कारण जानने के लिए सलाहकार भेजा। सलाहकार ने आते ही आदेश नहीं दिए। उसने पूरी सुबह ध्यान से देखी।
उसने छोटी कटोरी देखी, हाथी के पैर के पास खाली जगह देखी और यह भी देखा कि सड़क की हर आहट पर हाथी सिर उठाता है।
“क्या पहले यहाँ कोई और रहता था?” उसने पूछा।
रखवाले ने छोटे बर्तन की ओर देखा। पहली बार उसे समझ आया कि उसने किस बात पर ध्यान नहीं दिया था।
जवाब सुनना

रखवाले ने सलाहकार को सब बताया—नाश्ते के टुकड़े, रोज़ की सैर और वह आदमी जो कुत्ते को ले गया था।
“मुझे लगा, दूसरा घर उसे अच्छा लगेगा,” उसने कहा। “मैंने दोनों को साथ देखकर समझने की कोशिश नहीं की।”
सलाहकार राजा के पास गया। “हाथी को अपने मित्र की याद आ रही है। हमें कुत्ते का हाल भी पता करना चाहिए।”
दूत खेतों के पार आदमी के घर पहुँचा। कुत्ता बगीचा देखने के बजाय दरवाज़े के पास लेटा था। दूत ने तालाब वाले रास्ते की बात की तो वह खड़ा हो गया और कान उठा लिए।
आदमी ने पूरी बात सुनी। उसे नहीं पता था कि वह कुत्ते को उसके साथी से अलग ले आया है।
वापस लौटने का रास्ता

राजा ने आदमी के पैसे वापस करवाए। रखवाले ने माना कि कुत्ते को अपने मित्र के पास रहना चाहिए। आदमी ने उसे लौटने दिया।
दूत उसे खेतों के पार वापस लाया। जाने-पहचाने मोड़ पर कुत्ता रुका, ज़मीन सूँघी और पूँछ हिलाने लगा।
बगीचे के फाटक पर दूत ने डोरी खोल दी।
कुत्ते को देखने से पहले ही हाथी ने तेज़ नन्हे कदम सुन लिए। उसने सिर उठाया।
कुत्ता थोड़ी दूर रुक गया, जैसे देख रहा हो कि सब सचमुच वहीं है—पेड़, बर्तन और बड़ा धूसर मित्र। फिर उसकी पूँछ के साथ पिछला हिस्सा भी हिलने लगा। वह जल्दी से छाया में पहुँचा।
उनकी रोज़ वाली सैर

हाथी ने सूँड़ नीचे की। कुत्ते ने अपनी नाक उससे लगाई। एक पल दोनों स्थिर रहे। फिर कुत्ता फाटक की ओर दौड़ा और पीछे देखा।
हाथी उसके पीछे चला।
दोनों पुराने रास्ते से तालाब गए। जड़ पर कुत्ता सूँघने रुका तो हाथी ने इंतज़ार किया। नीची डाल से हाथी ने पत्ते लिए तो कुत्ता बैठ गया।
रखवाला पीछे चल रहा था। अब वह उन छोटी बातों को देख रहा था, जिन्हें पहले जल्दी में छोड़ देता था।
तालाब के पास उसने कुत्ते की कटोरी में ताज़ा पानी रखा। हाथी ने उथले पानी से पिया। लौटते समय तीनों मोड़ पर तब तक रुके, जब तक सब आगे चलने के लिए तैयार नहीं हो गए।
फिर उसी पेड़ के नीचे

दोनों बर्तनों में रात का खाना रखा था। हाथी ने अपने पत्ते खाए। कुत्ते ने छोटी कटोरी साफ की और एक बार देखा कि कोई टुकड़ा बच तो नहीं गया।
रखवाला पानी लाया, फिर पास बैठ गया। बगीचे में शाम उतर रही थी। अब वह हाथी के पास की छोटी खाली जगह को मामूली नहीं समझेगा।
कुत्ता दो बार घूमा और हाथी के चौड़े पैर के पास लेट गया। उसने इतनी जगह छोड़ी कि पैर हिल सके। हाथी ने पास में सूँड़ रखी और आराम करने लगा।
फाटक के बाहर सड़क की आखिरी रोशनी मिट गई। अब किसी को लौटने का इंतज़ार नहीं था। कुत्ते ने नींद भरी साँस छोड़ी। पेड़ के नीचे दोनों मित्र सो गए। समाप्त।
About this Neutoons edition
A family retelling of the Elephant and Dog Jataka. The keeper’s sale is described simply, with the dog returned safely.
Source tradition: Jataka. Explore the source.
Neutoons English and Hindi text. AI-generated illustrations. Animated illustrations are available in the page-turning reader. The ten-page edition has no audio narration.

